सट्टा मटका का इतिहास | History of Satta Matka in Hindi
जानिए सट्टा मटका की शुरुआत कैसे हुई, राशि खत्री और कल्याणजी भगत की कहानी।
सट्टा मटका का इतिहास
सट्टा मटका भारत का एक प्रसिद्ध नंबर गेम है जिसकी शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। आइए जानते हैं इसका रोचक इतिहास।
शुरुआत कैसे हुई?
1960 के दशक में, लोग न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज के कपास के दामों पर सट्टा लगाते थे। जब भारत सरकार ने 1961 में इस पर प्रतिबंध लगाया, तो एक नई प्रणाली विकसित हुई।
कल्याणजी भगत - मटका के पिता
कल्याणजी भगत ने 1962 में कल्याण मटका की शुरुआत की। वे एक किसान थे जिन्होंने मुंबई में यह गेम शुरू किया।
कल्याणजी की विशेषताएं:
- ईमानदार व्यवसायी
- गरीबों की मदद करते थे
- पारदर्शी सिस्टम बनाया
राशि खत्री - न्यू वर्ली मटका
1964 में रतन खत्री (राशि खत्री) ने न्यू वर्ली मटका शुरू किया। उन्होंने कुछ बदलाव किए:
- सोमवार से शुक्रवार तक गेम
- नए नियम और दरें
- बड़ा नेटवर्क बनाया
मटका कैसे खेला जाता था?
पुराना तरीका (1960-1990):
- एक मटके (बर्तन) में चिट्ठियां डाली जाती थीं
- 0-9 नंबर लिखे होते थे
- किसी व्यक्ति द्वारा चिट्ठी निकाली जाती थी
- तीन नंबर निकाले जाते थे
आधुनिक तरीका (1990-वर्तमान):
- पेपर स्लिप सिस्टम
- फोन बुकिंग
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जैसे Matkabook)
महत्वपूर्ण तारीखें
| वर्ष | घटना | |------|-------| | 1961 | कपास सट्टे पर प्रतिबंध | | 1962 | कल्याण मटका शुरू | | 1964 | न्यू वर्ली मटका शुरू | | 1995 | पुलिस कार्रवाई बढ़ी | | 2000+ | ऑनलाइन मटका शुरू |
मुंबई - मटका की राजधानी
मुंबई को मटका की राजधानी कहा जाता है। यहां के प्रमुख इलाके थे:
- वर्ली
- पायधुनी
- मोहम्मद अली रोड
आज का मटका
आज मटका पूरी तरह से ऑनलाइन हो गया है। Matkabook जैसे प्लेटफॉर्म पर आप सुरक्षित तरीके से खेल सकते हैं।
निष्कर्ष
सट्टा मटका का 60+ साल पुराना इतिहास है। कल्याणजी भगत और राशि खत्री ने इसकी नींव रखी। आज यह एक आधुनिक ऑनलाइन गेम बन चुका है।
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